Sunday, 4 March 2018

फिर से एक आँधी लानी है



फिर से एक आँधी लानी है

ख्वाबों की महफिल सजानी है
बुझ गये परवानों में
एक शमा की लौ जलानी है

फिर से एक आँधी लानी है

मन में एक आस जगानी है
जंग लगी इन तलवारों में
एक नयी धार लगानी है

फिर से एक आँधी लानी है

दीप नहीं मशाल जलानी है
मन के इस द्वंद्वदल में
निर्णय  की तोप चलानी है

फिर से एक आँधी लानी है

No comments:

Post a Comment

संघर्ष से सीखा है मैंने

संघर्ष से सीखा  है मैंने                                 (१) संघर्ष से सीखा है मैंने,                                तिनके ...