फिर से एक आँधी लानी है
ख्वाबों की महफिल सजानी है
बुझ गये परवानों में
एक शमा की लौ जलानी है
फिर से एक आँधी लानी है
मन में एक आस जगानी है
जंग लगी इन तलवारों में
एक नयी धार लगानी है
फिर से एक आँधी लानी है
दीप नहीं मशाल जलानी है
मन के इस द्वंद्वदल में
निर्णय की तोप चलानी है
फिर से एक आँधी लानी है
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