जिंदगी क्या है और क्यों हमें इससे उम्मीदें रखनी चाहिए। अब अपनी कहानी क्या बताऊ आपको मैं खुद भी किसी से उम्मीद लगा बैठा था और उम्मीद उम्मीद होती है सो टूट गयी। जब उम्मीद टूटी तब मुझे अपने बड़े भैया की एक बात याद आयी, उन्ही के शब्दों में " सोनू ! कभी किसी से भी उम्मीद मत लगाना, उम्मीद टूटते देर नहीं लगती" खैर जो हुआ सो हुआ। अब आप इन पंक्तियों को तनिक हृदय से समझे, फिर से उम्मीद लगाता हूँ पसंद जरूर आयेगी------
जिदंगी मुझ नाचीज से तो पहले ही खफा थी
और फिर मुझसे कहने लगी
"तेरी उम्मीदों की मंजिल कहाँ है"
पर मैं तो खफा न था जिदंगी से
कह दिया मैंने भी
"वो कच्ची उम्मीदों के पत्थर थे
इसलिए मंजिल ही ढह गई "
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