आज के दौर में अत्याचार की तो हद ही हो गयी है ऐसे में हर एक व्यक्ति उलझन में है कि कही न कही कोई उम्मीद की किरण नज़र आ जाये और वो इस पीड़ामय संसार से निकल जाये। आज के रामनवमी के अवसर पर मेरा एक मुक्तक प्रभु श्री राम के नाम
जय श्री राम
जय श्री राम
फिर से त्रेता का काल आ जाए
वो पुरूषोत्तम पुनः दर्शन दे जाए
अन्याय के दंश का नाश करने वाले,
काश कलियुग में भी वे राम आ जाए

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