दिल के जज़्बात क्या होते हैं कभी सोचा है, शायद मैं भी यही सोच रहा हूँ। तभी बेवजह की ये पंक्तियाँ लिख रहा हूँ, अब करु भी तो क्या इस दिल का लिखता तो हूँ पर पता नहीं क्यों सब कुछ अजीब सा लगता है। पर जो भी हो लिखकर दिल को जरूर सुकून मिल जाता है
पेश है कुछ अलग-----
मेरे दिल के अधूरे जज्बात
और इन जज्बातों की अधूरी सी कहानी हो तुम
कैसे बयां करूं इसको
"क्योंकि कलम भी काल्पनिक है और कागज भी"
Shaandaar
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