आज मैं आनासागर के तट पर बैठा था और शीतल हवाओं और लहरों को महसूस कर रहा था तभी कुछ लिखने का मन किया और मैंने ये लिख दिया शायद ये कुछ मेरे से ज्यादा ही जुडी है इसलिए......
सोचा था इन लहरों में कही खो जाऊ
डूब जाऊ इन हसीं लम्हों में
तभी एक विचार कौंधा
क्यों खो जाऊ इन लहरों में ?
क्यों डूब जाऊ लम्हों में ?
न ये लम्हें अपने हैं
और ना ही ये लहरें...
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