घर सबको प्यारा होता है और एक व्यक्ति के लिए शायद ही घर से महत्वपूर्ण कोई और चीज़ होती है। मेरी कहानी भी कुछ इस कदर ही है मुझे भी अपने घर से ज्यादा प्यारा और कुछ नहीं। मेरा घर मेरे जन्म से भी पहले से कही सारी परेशनियों से गुज़र चुका है और ये जो कविता है वो मेरे जीवन की वास्तविक घटना पर आधारित है।
मैंने देखी है कई तकलीफें
पर घर ने तो असीम दर्द का मंजर देखा है
मैंने देखा है घर को बनते हुए
पर घर ने तो परिवार बनते देखा है
मैंने देखा है नयी पीढ़ियों को उगते हुए
पर घर ने तो इन्हें वृक्ष बनते देखा है
मैंने देखा है पूराने घर को टूटते हुए
पर घर ने तो रिश्तों को टूटते देखा है
मैंने देखा है पिता को जूझते हुए
पर घर ने तो पूरे वंश को दर्द में देखा है
मैंने देखा है रिश्तों को छल करते हुए
पर घर ने तो पूरे कुटुंब का दंश देखा है
मैंने देखा है दर्द का महज एक पन्ना
पर घर ने तो दर्द की पुस्तक लिखते देखा है
मैंने देखा है उम्मीद को मरते हुए
पर घर ने तो इसे श्मशान में जलते देखा है
मैंने देखा है ख्वाबों को बनते हुए
पर घर ने तो ख्वाबों को सच होते देखा है
मैंने देखा है अंततः पिता को खुश होते हुए
पर घर ने तो पूर्वजों को इस पल के लिए रोते देखा है
👍 यथार्थ
ReplyDeleteधन्यवाद कविवर...
DeleteOsm
ReplyDeleteThanks RAMU
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