अमृता बाई का बलिदान इतिहास के महान बलिदानों की किताब का ही एक पन्ना है। इस पन्ने का यह अध्याय इस महान देवी के शौर्य और पराक्रम की गाथा बताता है। मैंने अपनी मातृ भाषा राजस्थानी में चार पंक्तियाँ इस देवी को श्रृद्धांजलि के रूप में भेंट की है---
अमृता बाई रा बळिदाण ने आपा कियां भूलगा
दिन-रात बेचारा रूंखङा ने ईयां ही काटबा लागा
अगर थे थाकी धरती माता सू घणो लाङ करो
तो रूंखङो लगाओ जर ही लागी सरग माई आगा
No comments:
Post a Comment