पहली बार गज़ल लिखी है और मेरे लिए शायद ही इससे ज्यादा खुशी की बात और कोई हो सकेगी ।
आप इसे पढ़े और सुझाव लिखे
हसीन थी मुलाकातें प्यार की
तमाम जुङी यादें दीदार की
यूं ही नहीं बनी थी तस्वीर
तलब थी सीने में इकरार की
आज भी आ जाती है सामने
दफ्ऩ तकलीफ़ें तकरार की
हर रोज़ याद दिलाती है रातें
वक़्त दर वक़्त इंतज़ार की
हकीक़त से वाकिफ 'नवाज़िश'
भूला चुका है बातें प्यार की
- सुनिल जांगिङ ' नवाज़िश '
No comments:
Post a Comment