Monday, 28 May 2018

पहली गज़ल


पहली बार गज़ल लिखी है और मेरे लिए शायद ही इससे ज्यादा खुशी की बात और कोई हो सकेगी ।
आप इसे पढ़े और सुझाव लिखे

हसीन  थी मुलाकातें प्यार की
तमाम  जुङी यादें  दीदार  की

यूं  ही  नहीं  बनी   थी  तस्वीर
तलब  थी  सीने में इकरार की

आज भी  आ जाती है सामने
दफ्ऩ  तकलीफ़ें  तकरार  की

हर रोज़ याद दिलाती  है  रातें
वक़्त  दर  वक़्त  इंतज़ार  की

हकीक़त से वाकिफ 'नवाज़िश'
भूला  चुका  है  बातें  प्यार की


  - सुनिल जांगिङ ' नवाज़िश '

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