Monday, 26 March 2018

आखिर क्यों हूँ मैं

हमने देखा है कि मनुष्य इस धरती पर जन्म लेते ही इस सोच में पड़ जाता है की हमें भगवान ने किसलिए भेजा है क्योंकि बिना किसी उद्देश्य के तो कुछ भी घटित नहीं होता है।  इसलिए मैंने इसे अपने ऊपर लेते हुए ही ये कुछ पंक्तियाँ लिखी है उम्मीद है आप लोगों को ये जरूर पसन्द आयेगी।  आशा करता हूँ की आप मेरे इस प्रयास को सराहेंगे
तो पेश है---


आखिर क्यों हूँ मैं
अब तक उम्मीद की तलाश में हूँ या
उम्मीदों के पूर्ण न होने के दुख में हूँ

आखिर क्यों हूँ मैं
ख्वाब को हकीकत बनाने में हूँ याख्वाबों से निकलने के प्रयास में हूँ

आखिर क्यों हूँ मैं
कामयाबी के नये पथ की ओर हूँ यानाकामयाबी की वजह ढूँढ रहा हूँ

आखिर क्यों हूँ मैं
जहाँ को कुछ देने की आस में हूँ याइस जहाँ में यूं ही खो जाने में हूँ

आखिर क्यों हूँ मैं
प्यार के जाल में फँस जाने में हूँ या
प्यार से जग को जीत जाने की जद में हूँ

आखिर क्यों हूँ मैं
अपने हाथों को सख्त बनाने के लिए हूं याकिसी के समक्ष हाथ फैलाने के लिए हूँ
आखिर क्यों हूँ मैं
पिता का सहारा बनने इस जहाँ में हूँ याजहाँ-तहाँ उन्हें बेसहारा छोङने में हूँ

आखिर क्यों हूँ मैं.........

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